The Essence of the Tantra· 4.33 / 46

The Essence of the Tantra4.33

4.33

यया च दर्पणहस्त्यादिवत् भेदाभेदाभ्यां सा अस्य श्रीपरापरशक्तिः

Transliteration (IAST)

yayā ca darpaṇahastyādivat bhedābhedābhyāṃ sā asya śrīparāparaśaktiḥ

— दर्पण में हाथी आदि के समान ; — भेद और अभेद दोनों से ; — श्रीपरापराशक्ति — पर-तथा-अपर शक्ति

और जिसके द्वारा वह दर्पण में हाथी आदि की भाँति भेद-अभेद दोनों से (भासित करता है) — वह उसकी श्रीपरापराशक्ति है।