The Essence of the Tantra· 3.27 / 34

The Essence of the Tantra3.27

3.27

इत्य् एवम् इयतो यदा निर्विभागतया एव परामर्शः तदा एक एव भगवान् बीजयोनितया भागशः परामर्शे शक्तिमान् शक्तिश् च

Transliteration (IAST)

ity evam iyato yadā nirvibhāgatayā eva parāmarśaḥ tadā eka eva bhagavān bījayonitayā bhāgaśaḥ parāmarśe śaktimān śaktiś ca

— इतने (समस्त विस्तार) का ; — निर्विभाग रूप से — अविभक्त रूप में ; — परामर्श — विमर्श ; — एक ही भगवान् ; — बीज-योनि रूप से (स्वर-व्यञ्जन रूप से) ; — भागशः परामर्श होने पर — अंश-अंश में विमर्श होने पर ; — शक्तिमान् और शक्ति — दोनों

इस प्रकार जब इतने (समस्त) का परामर्श निर्विभाग रूप से होता है, तब एक ही भगवान् होते हैं; और जब बीज-योनि रूप से भागशः (अंश-अंश में) परामर्श होता है, तब वे शक्तिमान् (शक्तिधारी) और शक्ति — दोनों होते हैं।