The Essence of the Tantra· 22.17 / 53

The Essence of the Tantra22.17

22.17

अथ यामले शक्तेर् लक्षणम् एतत् तद्वद् अभेदस् ततो ऽनपेक्ष्य वयः । जात्यादींश् चासङ्गात् लोकेतरयुगलजं हि तादात्म्यम्

Transliteration (IAST)

atha yāmale śakter lakṣaṇam etat tadvad abhedas tato 'napekṣya vayaḥ | jātyādīṃś cāsaṅgāt loketarayugalajaṃ hi tādātmyam

— अब यामल (युगल) में (याग) ; — शक्ति का लक्षण ; — वैसे ही (वीर का) अभेद ; — आयु की अपेक्षा न करके ; — जाति आदि (की अपेक्षा न करके) ; — असङ्ग (अनासक्ति) से ; — लोकोत्तर युगल से जनित ; — तादात्म्य

अब यामल में (याग) — शक्ति का यह लक्षण है, तथा वैसे ही (वीर का) अभेद (है)। अतः आयु, जाति आदि की अपेक्षा न करके, असङ्ग (अनासक्ति) से, लोकोत्तर युगल से जनित तादात्म्य ही (आधार है)।