कार्यहेतुसहोत्थत्वात् त्रैधं साक्षाद् अथान्यथा । कॢप्तावतो मिथो ऽभ्यर्च्य तर्प्यानन्दान्तिकत्वतः
Transliteration (IAST)
kāryahetusahotthatvāt traidhaṃ sākṣād athānyathā | kḷptāvato mitho 'bhyarcya tarpyānandāntikatvataḥ
कार्य एवं हेतु के सह-उत्थान के कारण (तादात्म्य) त्रिविध (होता है) — साक्षात्, अथवा अन्यथा (परोक्ष)। उन दोनों कॢप्त (विधिवत् संयोजित) के परस्पर अभ्यर्चन करके, तर्पण करके, आनन्द की समीपता के कारण,