The Essence of the Tantra· 22.19 / 53

The Essence of the Tantra22.19

22.19

चक्रम् अर्चेत् तदौचित्याद् अनुचक्रं तथानुगम् । बहिः पुष्पादिनान्तश् च गन्धभुक्त्यासवादिभिः

Transliteration (IAST)

cakram arcet tadaucityād anucakraṃ tathānugam | bahiḥ puṣpādināntaś ca gandhabhuktyāsavādibhiḥ

— चक्र की पूजा करे ; — उसके औचित्य के अनुसार ; — अनुगामी अनुचक्र की (पूजा करे) ; — बाहर पुष्प आदि से ; — भीतर गन्ध, भुक्ति (भोजन), आसव आदि से

चक्र की पूजा करे — उसके औचित्य के अनुसार, तथा वैसे ही अनुगामी अनुचक्र की (पूजा करे) — बाहर पुष्प आदि से, एवं भीतर गन्ध, भुक्ति (भोजन), आसव आदि से।