The Essence of the Tantra· 22.20 / 53

The Essence of the Tantra22.20

22.20

एवम् आनन्दसन्दोहिततच्चेष्टोच्छलत्स्थितिः । अनुचक्रगणश् चक्रतादात्म्याद् अभिलीयते

Transliteration (IAST)

evam ānandasandohitatacceṣṭocchalatsthitiḥ | anucakragaṇaś cakratādātmyād abhilīyate

— आनन्द में सन्दोहित (एकत्रित) ; — उस (आनन्दमय) चेष्टा से उच्छलित स्थिति वाला ; — अनुचक्र-गण (उनकी अधिष्ठात्री देवियाँ) ; — (केन्द्रीय) चक्र के साथ तादात्म्य से ; — विलीन हो जाता है

इस प्रकार आनन्द में सन्दोहित (एकत्रित) उस (आनन्दमय) चेष्टा से उच्छलित स्थिति वाला अनुचक्र-गण (केन्द्रीय) चक्र के साथ तादात्म्य से (उसमें) विलीन हो जाता है।