The Essence of the Tantra· 22.16 / 53

The Essence of the Tantra22.16

22.16

एवं स्वदेहे तत्रैव चक्रे ततो ब्रह्मरन्ध्राद्यनुचक्रेषु

Transliteration (IAST)

evaṃ svadehe tatraiva cakre tato brahmarandhrādyanucakreṣu

— इसी प्रकार अपने देह में ; — उसी (केन्द्रीय) चक्र में ; — ब्रह्मरन्ध्र आदि अनुचक्रों में

इसी प्रकार अपने देह में, उसी (केन्द्रीय) चक्र में, तत्पश्चात् ब्रह्मरन्ध्र आदि अनुचक्रों में (पूजा करे)।