The Essence of the Tantra· 13.7 / 101

The Essence of the Tantra13.7

13.7

अन्वर्थं चैतन् नाम रुद्रशक्तिमालाभिर् युक्ता फलेषु पुष्पिता संसारशिशिरसंहारनादभ्रमरी सिद्धिमोक्षधारिणी दानादानशक्तियुक्ता इति रलयोर् एकत्वस्मृतेः

Transliteration (IAST)

anvarthaṃ caitan nāma rudraśaktimālābhir yuktā phaleṣu puṣpitā saṃsāraśiśirasaṃhāranādabhramarī siddhimokṣadhāriṇī dānādānaśaktiyuktā iti ralayor ekatvasmṛteḥ

— अन्वर्थ — व्युत्पत्ति से सार्थक ; — रुद्र-शक्तियों की मालाओं से (युक्त) ; — फलों में पुष्पित (लदी हुई) ; — संसार के शीत का संहार करने वाले नाद की भ्रमरी ; — सिद्धि एवं मोक्ष को धारण करने वाली ; — दान-आदान शक्ति से युक्त ; — 'र' और 'ल' की एकता स्मृत होने के कारण

और यह नाम अन्वर्थ (सार्थक) है: वह रुद्र-शक्तियों की मालाओं से युक्त, फलों में पुष्पित, संसार के शिशिर (शीत) का संहार करने वाले नाद की भ्रमरी, सिद्धि एवं मोक्ष को धारण करने वाली, दान-आदान शक्ति से युक्त है — क्योंकि 'र' और 'ल' की एकता स्मृत है (अतः 'मालिनी' का अर्थ 'मारिणी', दान-आदान-शक्तियुक्ता भी होता है)।