The Essence of the Tantra· 10.5 / 18

The Essence of the Tantra10.5

10.5

पुमादिमायान्ते विद्या वेद्यतिरोभावे संविदाधिक्यात्

Transliteration (IAST)

pumādimāyānte vidyā vedyatirobhāve saṃvidādhikyāt

— पुरुष से माया-पर्यन्त ; — विद्या-कला ; — वेद्य के तिरोभाव में (ज्ञेय के छिप जाने पर) ; — संवित् की अधिकता के कारण

पुरुष से लेकर माया-पर्यन्त विद्या (कला है), क्योंकि वेद्य के तिरोभाव में संवित् की अधिकता होती है।