The Essence of the Tantra· 10.4 / 18

The Essence of the Tantra10.4

10.4

जलादिप्रधानान्ते वर्गे प्रतिष्ठा कारणतयाप्यायनपूरणकारित्वात्

Transliteration (IAST)

jalādipradhānānte varge pratiṣṭhā kāraṇatayāpyāyanapūraṇakāritvāt

— जल से प्रधान-पर्यन्त ; — वर्ग में (तत्त्व-समूह में) ; — प्रतिष्ठा-कला ; — कारण रूप से ; — आप्यायन एवं पूरण करने के कारण

जल से लेकर प्रधान-पर्यन्त वर्ग में प्रतिष्ठा (कला है), क्योंकि वह कारण रूप से आप्यायन एवं पूरण करती है।