The Essence of the Tantra· 10.6 / 18

The Essence of the Tantra10.6

10.6

शुद्धविद्यादिशक्त्यन्ते शान्ता कञ्चुकतरङ्गोपशमात्

Transliteration (IAST)

śuddhavidyādiśaktyante śāntā kañcukataraṅgopaśamāt

— शुद्धविद्या से शक्ति-तत्त्व-पर्यन्त ; — शान्ता-कला ; — कञ्चुक-तरंगों के उपशम के कारण

शुद्धविद्या से लेकर शक्ति-पर्यन्त शान्ता (कला है), क्योंकि वहाँ कञ्चुक-तरंगों का उपशम होता है।