The Essence of the Tantra· 1.2 / 5

The Essence of the Tantra1.2

1.2

विततस् तन्त्रालोको विगाहितुं नैव शक्यते सर्वैः । ऋजुवचनविरचितम् इदं तु तन्त्रसारं ततः शृणुत

Transliteration (IAST)

vitatas tantrāloko vigāhituṃ naiva śakyate sarvaiḥ | ṛjuvacanaviracitam idaṃ tu tantrasāraṃ tataḥ śṛṇuta

— विस्तीर्ण, विस्तृत, सुदूर-व्याप्त ; — तन्त्रालोक (अभिनवगुप्त का महाग्रन्थ) ; — अवगाहन करना, गहराई में प्रवेश करना ; — नहीं किया जा सकता (शक्य नहीं है) ; — सब के द्वारा, सभी जनों से ; — सरल (ऋजु) वचनों में रचित ; — यह ; — तन्त्रसार (तन्त्र का सार) ; — अतः, इसलिए ; — सुनो

विस्तीर्ण तन्त्रालोक में सभी जन प्रवेश (अवगाहन) नहीं कर सकते; किन्तु यह तन्त्रसार सरल वचनों में रचा गया है — अतः इसे सुनो।