ato vindur ato nādo rūpam asmād ato rasaḥ |
pravartante 'cireṇaiva kṣobhakatvena dehinaḥ ||
anuṣṭubh
— इसलिए, अतः (अव्यय); — विन्दु (बिन्दु) — प्रकाश-बिन्दु (कर्ता कारक); — इसलिए, अतः (अव्यय); — नाद — आन्तरिक ध्वनि (कर्ता कारक); — रूप — आकार, वर्ण (कर्ता कारक, नपुंसक); — इससे (नपुं.पञ्चमी एक. सर्वनाम); — इसलिए, अतः (अव्यय); — रस — सूक्ष्म स्वाद (कर्ता कारक); — प्रवृत्त होती हैं, उद्यत होती हैं (वर्त. तृ.पु.बहु., √प्र-वृत्); — शीघ्र ही, अचिर काल में (अव्यय); — क्षोभकता से — विक्षेपकारी रूप में (करण कारक); — देहधारी के लिए — पु.षष्ठी एक.
इसी (उन्मेष) से बिन्दु (प्रकाश-बिन्दु), नाद (अन्तर-ध्वनि), रूप (दिव्य रूप) और रस (सूक्ष्म स्वाद) — देहधारी के लिए शीघ्र ही क्षोभकारी (चित्त-विक्षेपक) रूप में प्रवृत्त होते हैं।