— उस को (शङ्कर, आत्मा) — पु.कर्म एक.; — अधिष्ठातृ (शासक, अधिष्ठाता) भाव से (करण कारक — समासगत); — स्वभाव को, अपने वास्तविक स्वरूप को (कर्म कारक); — अवलोकन करते हुए, देखते हुए (वर्तमान कृदन्त, कर्ता कारक); — विस्मित होता हुआ, चकित-सा (वर्तमान कृदन्त, कर्ता कारक); — मानो, जैसे (तुलनार्थक अव्यय); — रहता है, अवस्थित होता है (वर्त. तृ.पु.एक., आत्मनेपद √आस्); — जो — पु.कर्ता एक. सम्बन्धवाचक सर्वनाम; — उसका — पु.षष्ठी एक. सर्वनाम; — यह — स्त्री.कर्ता एक.; — कुसृति — दुष्ट संसार-मार्ग, बुरा भ्रमण (कर्ता कारक, स्त्रीलिङ्ग); — कहाँ से? (अर्थात् कहीं से नहीं) — प्रश्नवाचक अव्यय
जो अपने स्वभाव को अधिष्ठातृ (शासक) रूप से देखते हुए विस्मित-सा रहता है — उसके लिए यह कुसृति (दुष्ट संसार-मार्ग) कहाँ से आ सकती है?