तस्मादस्मि निराकांक्षस्तृप्त्यान्यो होम ईदृशः ।
पूजनान्नास्ति मे तुष्टिर्नास्ति खेदो ह्यपूजनात् ॥९२॥
tasmādasmi nirākāṃkṣastṛptyānyo homa īdṛśaḥ |
pūjanānnāsti me tuṣṭirnāsti khedo hyapūjanāt
इसलिए मैं निराकांक्ष (आकांक्षा-रहित) हूँ; (इस) तृप्ति के द्वारा (ही) ऐसा अन्य होम (होता) है। पूजन से मुझे कोई तुष्टि नहीं, और अपूजन से कोई खेद (भी) निश्चय ही नहीं।