The Vision of Śiva· 7.92 / 122

The Vision of Śiva7.92

7.92
तस्मादस्मि निराकांक्षस्तृप्त्यान्यो होम ईदृशः । पूजनान्नास्ति मे तुष्टिर्नास्ति खेदो ह्यपूजनात् ॥९२॥
tasmādasmi nirākāṃkṣastṛptyānyo homa īdṛśaḥ | pūjanānnāsti me tuṣṭirnāsti khedo hyapūjanāt
— इसलिए ; — मैं निराकांक्ष हूँ ; — तृप्ति के द्वारा ; — अन्य होम ; — ऐसा ; — पूजन से ; — मुझे तुष्टि नहीं ; — खेद नहीं ; — निश्चय ही ; — अपूजन से

इसलिए मैं निराकांक्ष (आकांक्षा-रहित) हूँ; (इस) तृप्ति के द्वारा (ही) ऐसा अन्य होम (होता) है। पूजन से मुझे कोई तुष्टि नहीं, और अपूजन से कोई खेद (भी) निश्चय ही नहीं।