The Vision of Śiva· 7.93 / 122

The Vision of Śiva7.93

7.93
पूजकैरविभेदेन सदा पूजेति पूजनम् । अत्राकारे च मे पूजा या स्यात् सादाशिवात्मनि ॥९३॥
pūjakairavibhedena sadā pūjeti pūjanam | atrākāre ca me pūjā yā syāt sādāśivātmani
— पूजकों के साथ ; — अविभेद (अभिन्नता) के द्वारा ; — सदा (होने वाली) पूजा ; — यही ; — (सच्चा) पूजन ; — इस आकार में ; — और मेरी पूजा ; — जो हो ; — सादाशिव-स्वरूप आत्मा में

पूजकों के साथ अविभेद (अभिन्नता) के द्वारा सदा (होने वाली) पूजा — यही (सच्चा) पूजन है; और इस आकार में मेरी पूजा (वही) है, जो सादाशिव-स्वरूप आत्मा में (आश्रित) हो।