The Vision of Śiva· 7.94 / 122

The Vision of Śiva7.94

7.94
लिंगादिके पूजितोऽस्मि सदा पूजेति वा स्थिता । पूजकः पूजनं पूज्यमिति सर्वं शिवः स्थितः ॥९४॥
liṃgādike pūjito'smi sadā pūjeti vā sthitā | pūjakaḥ pūjanaṃ pūjyamiti sarvaṃ śivaḥ sthitaḥ
— लिंग आदि में ; — 'मैं पूजित हूँ' ; — सदा (होने वाली) पूजा ; — अथवा इस प्रकार स्थित ; — पूजक ; — पूजन ; — पूज्य ; — इस प्रकार ; — सब कुछ ; — शिव (के रूप में) स्थित

'लिंग आदि में मैं ही पूजित हूँ' — अथवा इस प्रकार सदा (होने वाली) पूजा स्थित (रहती) है; पूजक, पूजन तथा पूज्य — इस प्रकार सब कुछ शिव (के रूप में) स्थित है।