लिंगादिके पूजितोऽस्मि सदा पूजेति वा स्थिता ।
पूजकः पूजनं पूज्यमिति सर्वं शिवः स्थितः ॥९४॥
liṃgādike pūjito'smi sadā pūjeti vā sthitā |
pūjakaḥ pūjanaṃ pūjyamiti sarvaṃ śivaḥ sthitaḥ
'लिंग आदि में मैं ही पूजित हूँ' — अथवा इस प्रकार सदा (होने वाली) पूजा स्थित (रहती) है; पूजक, पूजन तथा पूज्य — इस प्रकार सब कुछ शिव (के रूप में) स्थित है।