The Vision of Śiva· 7.41 / 122

The Vision of Śiva7.41

7.41
देवताहेमनिर्माणसन्निधानस्फुटार्थताः । साम्मुख्यवृत्तिदेहान्तरतिरागमहागुणाः ॥४१॥
devatāhemanirmāṇasannidhānasphuṭārthatāḥ | sāmmukhyavṛttidehāntaratirāgamahāguṇāḥ
— देवता तथा स्वर्ण-निर्माण, सन्निधान, अर्थों की स्फुटता ; — साम्मुख्य, अन्य देह में वृत्ति, तीव्र अनुराग रूप महागुण

(इनसे प्रकट होते हैं) देवता तथा स्वर्ण का निर्माण, (वस्तुओं का) सन्निधान (समीप लाना), अर्थों (पदार्थों) की स्फुटता (विशदता); (तथा) महागुण (विशिष्ट सिद्धियाँ) — साम्मुख्य (इष्ट की प्रत्यक्ष उपस्थिति), अन्य देह में वृत्ति (प्रवेश), तथा तीव्र अनुराग (आकर्षण-शक्ति)।