The Vision of Śiva· 7.42 / 122

The Vision of Śiva7.42

7.42
देहान्तरेषु संक्रान्तिः परित्यागोऽपरेष्वपि । अन्तर्मुखमुखाक्ष्यादिक्रमगोचरचिद्गतेः ॥४२॥
dehāntareṣu saṃkrāntiḥ parityāgo'pareṣvapi | antarmukhamukhākṣyādikramagocaracidgateḥ
— अन्य देहों में ; — संक्रान्ति (प्रवेश) ; — परित्याग (अपने देह का) ; — अन्यों में भी ; — अन्तर्मुख मुख, नेत्र आदि के क्रम से विचरण करती चित् की गति के गोचर होने के कारण

(प्रकट होते हैं) अन्य देहों में संक्रान्ति (प्रवेश), (अपने देह का) परित्याग, तथा अन्यों में भी (प्रवेश) — अन्तर्मुख मुख, नेत्र आदि के क्रम से (विचरण करते हुए) चित् की गति के गोचर (विषय) होने के कारण।