The Vision of Śiva· 7.117 / 122

The Vision of Śiva7.117

7.117
सधर्मचारिणीं सम्यग्गत्वा तत्पितरं स्वयम् । अर्थयित्वा ब्राह्मणीं तामानयामास यत्नतः ॥११७॥
sadharmacāriṇīṃ samyaggatvā tatpitaraṃ svayam | arthayitvā brāhmaṇīṃ tāmānayāmāsa yatnataḥ
— सधर्मचारिणी (धर्मपत्नी) के रूप में ; — भलीभाँति ; — जाकर ; — उसके पिता के पास ; — स्वयं ; — याचना करके ; — उस ब्राह्मणी को ; — ले आया ; — यत्नपूर्वक

— सधर्मचारिणी (धर्मपत्नी) के रूप में, स्वयं भलीभाँति उसके पिता के पास जाकर तथा (कन्या की) याचना करके, उस ब्राह्मणी को यत्नपूर्वक (वधू के रूप में घर) ले आया।