The Vision of Śiva· 7.118 / 122

The Vision of Śiva7.118

7.118
ब्राह्मणेन विवाहेन ततो जातस्तथाविधः । तेन यः स च कालेन कश्मीरेष्वागतो भ्रमन् ॥११८॥
brāhmaṇena vivāhena tato jātastathāvidhaḥ | tena yaḥ sa ca kālena kaśmīreṣvāgato bhraman
— ब्राह्मण-विवाह से ; — तब ; — उत्पन्न हुआ ; — वैसे ही (सिद्ध) प्रकार का ; — उससे ; — और जो वह ; — कालक्रम से ; — कश्मीर में ; — आया ; — विचरण करता हुआ

उस ब्राह्मण-विवाह से तब वैसे ही (सिद्ध) प्रकार का (पुत्र) उत्पन्न हुआ; और जो वह (पुत्र) था, वह कालक्रम से विचरण करता हुआ कश्मीर में आया।