रूपयौवनसौभाग्यबन्धुरा सा गता दृशम् ।
दृष्ट्वा तां लक्षणैर्युक्तां योग्यां कन्यामथात्मनः ॥११६॥
rūpayauvanasaubhāgyabandhurā sā gatā dṛśam |
dṛṣṭvā tāṃ lakṣaṇairyuktāṃ yogyāṃ kanyāmathātmanaḥ
वह रूप, यौवन तथा सौभाग्य से बन्धुरा (मनोहर) उसकी दृष्टि में आई; (और) उस (कन्या) को (शुभ) लक्षणों से युक्त देखकर, (उसे) अपने लिए योग्य कन्या (मानकर) —