The Vision of Śiva· 7.116 / 122

The Vision of Śiva7.116

7.116
रूपयौवनसौभाग्यबन्धुरा सा गता दृशम् । दृष्ट्वा तां लक्षणैर्युक्तां योग्यां कन्यामथात्मनः ॥११६॥
rūpayauvanasaubhāgyabandhurā sā gatā dṛśam | dṛṣṭvā tāṃ lakṣaṇairyuktāṃ yogyāṃ kanyāmathātmanaḥ
— रूप, यौवन तथा सौभाग्य से बन्धुरा (मनोहर) ; — वह ; — दृष्टि में आई ; — देखकर ; — उस (कन्या) को ; — लक्षणों से युक्त ; — योग्य कन्या ; — तब अपने लिए

वह रूप, यौवन तथा सौभाग्य से बन्धुरा (मनोहर) उसकी दृष्टि में आई; (और) उस (कन्या) को (शुभ) लक्षणों से युक्त देखकर, (उसे) अपने लिए योग्य कन्या (मानकर) —