The Vision of Śiva· 7.11 / 122

The Vision of Śiva7.11

7.11
तथापि योजितो युक्त्या प्रकाशमधिकं गृहे । दीपेनान्यतमेनापि न तथा वह्निराशिना ॥११॥
tathāpi yojito yuktyā prakāśamadhikaṃ gṛhe | dīpenānyatamenāpi na tathā vahnirāśinā
— तथापि ; — प्रयोजित ; — युक्ति से ; — अधिक प्रकाश ; — गृह में ; — दीप के द्वारा ; — एक भी (सुस्थापित) ; — उतना नहीं ; — अग्नि-राशि से

तथापि युक्ति (उचित विधि) से प्रयोजित एक भी (सुस्थापित) दीप गृह में अधिक प्रकाश (देता है), (कुशलता-रहित ढंग से ढेर की गई) अग्नि-राशि से (भी) उतना नहीं (— इसी प्रकार विज्ञात तत्त्व का कुशल प्रयोग अधिक फल देता है)।