तथापि योजितो युक्त्या प्रकाशमधिकं गृहे ।
दीपेनान्यतमेनापि न तथा वह्निराशिना ॥११॥
tathāpi yojito yuktyā prakāśamadhikaṃ gṛhe |
dīpenānyatamenāpi na tathā vahnirāśinā
तथापि युक्ति (उचित विधि) से प्रयोजित एक भी (सुस्थापित) दीप गृह में अधिक प्रकाश (देता है), (कुशलता-रहित ढंग से ढेर की गई) अग्नि-राशि से (भी) उतना नहीं (— इसी प्रकार विज्ञात तत्त्व का कुशल प्रयोग अधिक फल देता है)।