The Vision of Śiva· 6.94 / 126

The Vision of Śiva6.94

6.94
मलित्वमात्मनां प्रोक्तं सर्वभावेषु भेदिता । सत्यमुक्तमारुरुक्षोस्तत्क्रमप्रतिपत्तये ॥९४॥
malitvamātmanāṃ proktaṃ sarvabhāveṣu bheditā | satyamuktamārurukṣostatkramapratipattaye
— मलित्व ; — आत्माओं का ; — कहा गया है ; — समस्त भावों में ; — भेदिता ; — सत्य ; — कहा गया है ; — आरोहण के इच्छुक का ; — उस क्रम की प्रतिपत्ति के लिए

(उत्तर:) आत्माओं का मलित्व (मलयुक्त होना) कहा गया है, तथा समस्त भावों में भेदिता (भिन्नता) — सत्य है, ऐसा कहा गया है, (किन्तु केवल) आरोहण के इच्छुक (साधक) के लिए, उस क्रम (की प्रत्यभिज्ञा-पर्यन्त) की प्रतिपत्ति के निमित्त।