मलित्वमात्मनां प्रोक्तं सर्वभावेषु भेदिता ।
सत्यमुक्तमारुरुक्षोस्तत्क्रमप्रतिपत्तये ॥९४॥
malitvamātmanāṃ proktaṃ sarvabhāveṣu bheditā |
satyamuktamārurukṣostatkramapratipattaye
(उत्तर:) आत्माओं का मलित्व (मलयुक्त होना) कहा गया है, तथा समस्त भावों में भेदिता (भिन्नता) — सत्य है, ऐसा कहा गया है, (किन्तु केवल) आरोहण के इच्छुक (साधक) के लिए, उस क्रम (की प्रत्यभिज्ञा-पर्यन्त) की प्रतिपत्ति के निमित्त।