The Vision of Śiva· 6.72 / 126

The Vision of Śiva6.72

6.72
विरोधे दण्डघटयोर्दृष्टान्तोऽस्ति न ते क्वचित् । तेजसा तमसो यस्मान्न विनाशस्त्वयेष्यते ॥७२॥
virodhe daṇḍaghaṭayordṛṣṭānto'sti na te kvacit | tejasā tamaso yasmānna vināśastvayeṣyate
— विरोध के विषय में ; — दण्ड और घट के ; — दृष्टान्त ; — नहीं है ; — तुम्हारे पास ; — कहीं ; — तेज (प्रकाश) से ; — तम (अन्धकार) का ; — क्योंकि ; — न विनाश ; — तुम्हें ; — इष्ट

(जैसा तुम पोषण करते हो वैसी) दण्ड और घट के विरोध के विषय में — तुम्हारे पास उसका कहीं (कोई वैध) दृष्टान्त नहीं; क्योंकि तेज (प्रकाश) से तम (अन्धकार) का विनाश तुम्हें इष्ट नहीं (बौद्ध के लिए तम केवल प्रकाश का अभाव है, कोई नष्ट होने वाली वस्तु नहीं)।