विनाशे कारणानां हि विनाशः कारणात्मना ।
स्वयं विनश्येन्मृत्पिण्ड एवं चेत्स विनश्यति ॥६९॥
vināśe kāraṇānāṃ hi vināśaḥ kāraṇātmanā |
svayaṃ vinaśyenmṛtpiṇḍa evaṃ cetsa vinaśyati
क्योंकि (कार्य के) विनाश में, विनाश कारणों पर, कारण-स्वरूप से (आश्रित) होता है; और (यदि कहो कि) मृत्पिण्ड स्वयं नष्ट हो जाएगा — यदि ऐसा (अर्थात् स्व-स्वभाव से ही नष्ट हो), तो वह (नियमतः) नष्ट हो ही जाता (और कुम्भकार की आवश्यकता ही न रहती)।