The Vision of Śiva· 6.68 / 126

The Vision of Śiva6.68

6.68
किं वा नाश्यं न मृत्पिण्डं घटस्य जनकं भवेत् । तदनाशे न किंचित्स्याद्घट एव न जायते ॥६८॥
kiṃ vā nāśyaṃ na mṛtpiṇḍaṃ ghaṭasya janakaṃ bhavet | tadanāśe na kiṃcitsyādghaṭa eva na jāyate
— अथवा क्या ; — नाश्य (नष्ट होने वाला) ; — मृत्पिण्ड नहीं ; — घट का जनक ; — हो सके ; — उसके न नष्ट होने पर ; — कुछ भी न होगा ; — घट ही ; — उत्पन्न नहीं होता

अथवा क्या नाश्य (नष्ट होने वाला) मृत्पिण्ड घट का जनक नहीं हो सकता? यदि वह (मिट्टी) नष्ट न हो, तो कुछ भी उत्पन्न नहीं होगा; (और यदि पूर्णतः नष्ट हो, तो) घट ही उत्पन्न नहीं होता (शून्य से)।