नानात्मभावे शैवे वा शैवे वाभेदवादिनि ।
सर्वस्य सर्वरूपत्वं सर्वात्मत्वमवारितम् ॥१२५॥
nānātmabhāve śaive vā śaive vābhedavādini |
sarvasya sarvarūpatvaṃ sarvātmatvamavāritam
चाहे नानात्म-भाव (बहु-आत्म-वाद) वाले शैव (मत) में हो, अथवा अभेदवादी (अभेद का प्रतिपादन करने वाले) शैव (मत) में — सबका सर्वरूपत्व (समस्त रूपों का धारण), तथा सर्वात्मत्व (सबका आत्मा होना), अवारित (निर्बाध) रूप से (सिद्ध) है।