The Vision of Śiva· 6.125 / 126

The Vision of Śiva6.125

6.125
नानात्मभावे शैवे वा शैवे वाभेदवादिनि । सर्वस्य सर्वरूपत्वं सर्वात्मत्वमवारितम् ॥१२५॥
nānātmabhāve śaive vā śaive vābhedavādini | sarvasya sarvarūpatvaṃ sarvātmatvamavāritam
— नानात्म-भाव वाले (शैव) में ; — अथवा शैव ; — अथवा शैव ; — अभेदवादी (में) ; — सबका ; — सर्वरूपत्व ; — सर्वात्मत्व ; — अवारित (निर्बाध)

चाहे नानात्म-भाव (बहु-आत्म-वाद) वाले शैव (मत) में हो, अथवा अभेदवादी (अभेद का प्रतिपादन करने वाले) शैव (मत) में — सबका सर्वरूपत्व (समस्त रूपों का धारण), तथा सर्वात्मत्व (सबका आत्मा होना), अवारित (निर्बाध) रूप से (सिद्ध) है।