The Vision of Śiva· 6.126 / 126

The Vision of Śiva6.126

6.126
अनन्तशक्तियोगित्वादलुप्तत्वात् स्वशक्तिषु । स्थितं शिवत्वं सर्वत्र विशेषाच्छैववादिनाम् ॥१२६॥
anantaśaktiyogitvādaluptatvāt svaśaktiṣu | sthitaṃ śivatvaṃ sarvatra viśeṣācchaivavādinām
— अनन्त शक्तियों के योग के कारण ; — अलुप्त (अक्षीण) होने के कारण ; — अपनी शक्तियों में ; — अवस्थित ; — शिवत्व ; — सर्वत्र ; — विशेषतः ; — शैववादियों के लिए

अनन्त शक्तियों के योग के कारण, तथा अपनी शक्तियों में अलुप्त (अक्षीण) रहने के कारण, शिवत्व सर्वत्र अवस्थित है — और शैववादियों (शैव मत के प्रतिपादकों) के लिए (तो) विशेषतः (अधिक प्रकर्ष से)।