The Vision of Śiva· 7.1 / 122

The Vision of Śiva7.1

7.1
अथ स्थिते सर्वदिक्के शिवतत्त्वेऽधुनोच्यते । तस्मिञ्ज्ञातेऽथवाज्ञाते शिवत्वमनिवारितम् ॥१॥
atha sthite sarvadikke śivatattve'dhunocyate | tasmiñjñāte'thavājñāte śivatvamanivāritam
— अब ; — सिद्ध होने पर ; — सर्वदिक्क (सर्वत्र व्याप्त) ; — शिवतत्त्व के ; — अब ; — कहा जाता है ; — वह ; — ज्ञात होने पर ; — अथवा अज्ञात ; — शिवत्व ; — अनिवारित

अब, सर्वदिक्क (सर्वत्र व्याप्त) शिवतत्त्व के (इस प्रकार) सिद्ध हो जाने पर, अब (यह) कहा जाता है: वह (शिवतत्त्व) ज्ञात हो अथवा अज्ञात, (उसका) शिवत्व अनिवारित (निर्बाध) है (— वह किसी की प्रत्यभिज्ञा पर निर्भर हुए बिना अवस्थित रहता है)।