The Vision of Śiva· 6.12 / 126

The Vision of Śiva6.12

6.12
इत्याहुर्येऽपि क्रीडार्थमेवमात्मा व्यवस्थितः । इत्यूचुर्येऽप्रबुद्धत्वं पश्चाद्ब्रह्म प्रबुद्ध्यते ॥१२॥
ityāhurye'pi krīḍārthamevamātmā vyavasthitaḥ | ityūcurye'prabuddhatvaṃ paścādbrahma prabuddhyate
— इस प्रकार कहते हैं ; — जो ; — क्रीड़ा के लिए ; — इस (नाना) रूप में ; — आत्मा ; — स्थित ; — इस प्रकार कहा ; — जो ; — अप्रबुद्धत्व ; — बाद में ; — ब्रह्म ; — प्रबुद्ध होता है

इस प्रकार वे (कहते हैं) कि आत्मा क्रीड़ा के लिए इस (नाना) रूप में स्थित है; और (अन्य) यह कहते हैं कि (पहले) अप्रबुद्धत्व (अनजागरण) है, बाद में ब्रह्म प्रबुद्ध होता है।