इत्याहुर्येऽपि क्रीडार्थमेवमात्मा व्यवस्थितः ।
इत्यूचुर्येऽप्रबुद्धत्वं पश्चाद्ब्रह्म प्रबुद्ध्यते ॥१२॥
ityāhurye'pi krīḍārthamevamātmā vyavasthitaḥ |
ityūcurye'prabuddhatvaṃ paścādbrahma prabuddhyate
इस प्रकार वे (कहते हैं) कि आत्मा क्रीड़ा के लिए इस (नाना) रूप में स्थित है; और (अन्य) यह कहते हैं कि (पहले) अप्रबुद्धत्व (अनजागरण) है, बाद में ब्रह्म प्रबुद्ध होता है।