The Vision of Śiva· 6.11 / 126

The Vision of Śiva6.11

6.11
प्रतिबिम्बतया चान्ये ये वा सर्गमुखे स्वयम् । ब्रह्मैव गृह्णात्यात्मानं ततो भेदोपपादनम् ॥११॥
pratibimbatayā cānye ye vā sargamukhe svayam | brahmaiva gṛhṇātyātmānaṃ tato bhedopapādanam
— प्रतिबिम्ब-रूप से ; — और अन्य ; — अथवा जो ; — सर्ग (सृष्टि) के आरम्भ में ; — स्वयं ; — ब्रह्म ही ; — ग्रहण करता है ; — अपने को ; — उससे ; — भेद की उपपत्ति

और अन्य (इसे) प्रतिबिम्ब-रूप से (समझाते हैं); अथवा जो (मानते हैं कि) सर्ग (सृष्टि) के आरम्भ में ब्रह्म स्वयं ही अपने को ग्रहण करता है, और उससे भेद की उपपत्ति (होती है)।