यत्र देशे च काले च प्रवृत्तिस्तत्र संगमः ।
तत्रैव व्यवहारित्वसम्बन्धान्तरतायतः ॥६३॥
yatra deśe ca kāle ca pravṛttistatra saṃgamaḥ |
tatraiva vyavahāritvasambandhāntaratāyataḥ
जिस देश और काल में प्रवृत्ति (सफल क्रिया) होती है, वहाँ (शब्द-अर्थ का) संगम (है); और वहीं व्यवहारित्व-रूप अन्तर-सम्बन्ध (उसी अन्तर्निहित एकता से) (उत्पन्न होता है)।