The Vision of Śiva· 5.56 / 110

The Vision of Śiva5.56

5.56
एष इत्यपदिश्येत तज्ज्ञानं जनयेत् कथम् । करणत्वे कर्त्रपेक्षा कर्तृत्वे तदपेक्षता ॥५६॥
eṣa ityapadiśyeta tajjñānaṃ janayet katham | karaṇatve kartrapekṣā kartṛtve tadapekṣatā
— 'यह' ; — निर्दिष्ट किया भी जाए ; — उस (अग्नि) का ज्ञान ; — उत्पन्न करे ; — कैसे ; — करण (साधन) मानने पर ; — कर्ता की अपेक्षा ; — कर्तृत्व मानने पर ; — उसकी (कारक की) अपेक्षा

(मार्क) 'यह' — ऐसा निर्दिष्ट किया भी जाए, तो वह उस (अग्नि) का ज्ञान कैसे उत्पन्न करे? (यदि उसे) करण (साधन मानो), तो कर्ता की अपेक्षा (आती है); और कर्तृत्व (मानो), तो उसकी (एक और कारक की) अपेक्षा।