एष इत्यपदिश्येत तज्ज्ञानं जनयेत् कथम् ।
करणत्वे कर्त्रपेक्षा कर्तृत्वे तदपेक्षता ॥५६॥
eṣa ityapadiśyeta tajjñānaṃ janayet katham |
karaṇatve kartrapekṣā kartṛtve tadapekṣatā
(मार्क) 'यह' — ऐसा निर्दिष्ट किया भी जाए, तो वह उस (अग्नि) का ज्ञान कैसे उत्पन्न करे? (यदि उसे) करण (साधन मानो), तो कर्ता की अपेक्षा (आती है); और कर्तृत्व (मानो), तो उसकी (एक और कारक की) अपेक्षा।