The Vision of Śiva· 5.102 / 110

The Vision of Śiva5.102

5.102
संकल्पकेन चित्तेन तत्तज्ज्ञानमसंशयम् । संकल्पानां च सत्यत्वं पुरस्तात्प्रतिपादितम् ॥१०२॥
saṃkalpakena cittena tattajjñānamasaṃśayam | saṃkalpānāṃ ca satyatvaṃ purastātpratipāditam
— संकल्पक (संकल्प करने वाले) से ; — चित्त से ; — उस-उस का ज्ञान ; — निःसंदेह ; — संकल्पों का ; — और ; — सत्यत्व ; — पहले ; — प्रतिपादित

संकल्पक (संकल्प करने वाले) चित्त से उस-उस (विषय) का ज्ञान निःसंदेह (होता है); और संकल्पों का सत्यत्व पहले प्रतिपादित किया जा चुका है (अतः मन के स्वतन्त्र संकल्प मात्र कल्पना नहीं)।