The Vision of Śiva· 4.84 / 124

The Vision of Śiva4.84

4.84
अपूर्वयोर्गृहीतेऽपि तत्कालं गतयोर्द्वयोः । अगृहीते न गृहीतः सम्बन्धोऽग्निः प्रतीयते ॥८४॥
apūrvayorgṛhīte'pi tatkālaṃ gatayordvayoḥ | agṛhīte na gṛhītaḥ sambandho'gniḥ pratīyate
— पहले (साथ) न दिए गए दोनों का ; — गृहीत होने पर भी ; — अपने-अपने काल में ; — बीत चुके दोनों का ; — युगल का ; — (सम्बन्ध के) अगृहीत रहते ; — अगृहीत ; — सम्बन्ध ; — अग्नि ; — अनुमान किया जाता है

पहले कभी (साथ) न दिए गए उन दोनों (क्षणिक धूम-अग्नि) के, अपने-अपने काल में, गृहीत होने पर भी, दोनों बीत चुके; (अतः) सम्बन्ध के अगृहीत रहते, अगृहीत सम्बन्ध से (ही) अग्नि का अनुमान किया जाता है (— जो क्षणिकवादी के मत में असम्भव है)।