The Vision of Śiva· 4.85 / 124

The Vision of Śiva4.85

4.85
सामान्यमविशेषं चेदविशेषात्कुतः प्रमा । विशेषस्याप्यपूर्वत्वे कथं चास्ति समन्वयः ॥८५॥
sāmānyamaviśeṣaṃ cedaviśeṣātkutaḥ pramā | viśeṣasyāpyapūrvatve kathaṃ cāsti samanvayaḥ
— सामान्य ; — निर्विशेष ; — यदि ; — निर्विशेष से ; — प्रमा कहाँ से ; — विशेष का भी ; — अपूर्व (पहले अगृहीत) होने पर ; — और कैसे ; — समन्वय (व्याप्ति) है

यदि सामान्य निर्विशेष (विशेष-रहित) हो — तो निर्विशेष से प्रमा कहाँ से? और विशेष भी यदि अपूर्व (पहले अगृहीत) हो, तो समन्वय (व्याप्ति) कैसे हो?