The Vision of Śiva· 4.86 / 124

The Vision of Śiva4.86

4.86
सादृश्यादथ चेन्नास्ति याथात्म्येन समागमः । नच वात्रानुमानत्वं धूमतः केवलाद्भवेत् ॥८६॥
sādṛśyādatha cennāsti yāthātmyena samāgamaḥ | naca vātrānumānatvaṃ dhūmataḥ kevalādbhavet
— सादृश्य से ; — अब यदि ; — नहीं है ; — याथात्म्य (यथार्थ-स्वरूप) से ; — समागम ; — और न ; — यहाँ ; — अनुमानत्व ; — केवल धूम से ; — होगा

अब यदि (कहो कि अनुमान) सादृश्य से (होता है) — तो (वस्तु के) याथात्म्य (यथार्थ-स्वरूप) से (कोई) समागम (सम्बन्ध) नहीं; और यहाँ भी केवल धूम से अनुमानत्व नहीं बनेगा।