सादृश्यादथ चेन्नास्ति याथात्म्येन समागमः ।
नच वात्रानुमानत्वं धूमतः केवलाद्भवेत् ॥८६॥
sādṛśyādatha cennāsti yāthātmyena samāgamaḥ |
naca vātrānumānatvaṃ dhūmataḥ kevalādbhavet
अब यदि (कहो कि अनुमान) सादृश्य से (होता है) — तो (वस्तु के) याथात्म्य (यथार्थ-स्वरूप) से (कोई) समागम (सम्बन्ध) नहीं; और यहाँ भी केवल धूम से अनुमानत्व नहीं बनेगा।