शब्देन चेत्तदेवं हि सर्वसंसारनाशता ।
असत्यव्यवहारेण तादृगेव जगद्भवेत् ॥७४॥
śabdena cettadevaṃ hi sarvasaṃsāranāśatā |
asatyavyavahāreṇa tādṛgeva jagadbhavet
यदि (कहो कि) शब्द से ही (व्यवहार होता है, अर्थ-निरपेक्ष) — तो इस प्रकार समस्त संसार का नाश हो जाएगा; (क्योंकि) असत्य व्यवहार से जगत् भी वैसा ही (असत्य) हो जाएगा (— यह अनिष्ट है)।