The Vision of Śiva· 4.73 / 124

The Vision of Śiva4.73

4.73
असतः शशशृङ्गादेः शशशृङ्गादिनान्वयः । घटते जातुचिन्नैवमसतां व्यवहार्यता ॥७३॥
asataḥ śaśaśṛṅgādeḥ śaśaśṛṅgādinānvayaḥ | ghaṭate jātucinnaivamasatāṃ vyavahāryatā
— असत् का ; — शश-शृंग (खरगोश के सींग) आदि का ; — 'शश-शृंग' आदि (शब्द) के साथ ; — अन्वय (सम्बन्ध) ; — घटित होता है ; — कभी ; — ऐसा नहीं ; — असत् वस्तुओं की ; — व्यवहार्यता

(फिर भी) असत् शश-शृंग (खरगोश के सींग) आदि का 'शश-शृंग' आदि (शब्द) के साथ अन्वय (सम्बन्ध) कभी (कैसे) घटित होता है? इस प्रकार (अपोह-मत में) असत् वस्तुओं की व्यवहार्यता (अव्याख्यात रह जाती है — केवल चित् में आधारित होकर ही संगत होती है)।