नामसंस्थानभेदश्चेद्धस्ते मुष्ट्याद्यभेदिता ।
स्थितमेव हि सत्कार्यमत एवाविनाशिता ॥५३॥
nāmasaṃsthānabhedaśceddhaste muṣṭyādyabheditā |
sthitameva hi satkāryamata evāvināśitā
यदि (कहो कि) नाम और संस्थान (आकार) का (ही) भेद है — (तो देखो) हाथ में मुट्ठी आदि (हाथ से) अभिन्न हैं। अतः सत्कार्य स्थित ही है, और इसी कारण (वस्तु की) अविनाशिता (भी)।