The Vision of Śiva· 4.53 / 124

The Vision of Śiva4.53

4.53
नामसंस्थानभेदश्चेद्धस्ते मुष्ट्याद्यभेदिता । स्थितमेव हि सत्कार्यमत एवाविनाशिता ॥५३॥
nāmasaṃsthānabhedaśceddhaste muṣṭyādyabheditā | sthitameva hi satkāryamata evāvināśitā
— नाम और संस्थान (आकार) का भेद ; — यदि ; — हाथ में ; — मुट्ठी आदि की अभिन्नता ; — स्थित ही ; — निश्चय ही ; — सत्कार्य ; — इसी कारण ; — अविनाशिता

यदि (कहो कि) नाम और संस्थान (आकार) का (ही) भेद है — (तो देखो) हाथ में मुट्ठी आदि (हाथ से) अभिन्न हैं। अतः सत्कार्य स्थित ही है, और इसी कारण (वस्तु की) अविनाशिता (भी)।