The Vision of Śiva· 4.44 / 124

The Vision of Śiva4.44

4.44
घटान्तरं पूर्वदृष्टमाकलययाथ चेष्टनम् ॥४४॥
ghaṭāntaraṃ pūrvadṛṣṭamākalayayātha ceṣṭanam
— दूसरे घट को ; — पहले देखे हुए ; — आकलित करके ; — फिर ; — चेष्टा (प्रयत्न)

दूसरे, पहले देखे हुए घट को (मन में) आकलित करके (कुम्भकार) चेष्टा (प्रयत्न) करता है (अतः कार्य किसी रूप में पूर्व से ही चित् में विद्यमान है)।