अङ्कुरो जायत इति न भवेत्कारकात्मता ॥४५॥
aṅkuro jāyata iti na bhavetkārakātmatā
(यदि कहो कि) 'अंकुर उत्पन्न होता है' (शुद्ध असत् से) — तो (किसी की भी) कारक-स्वरूपता नहीं बनेगी (क्योंकि जो अभी असत् है उस पर क्रिया नहीं हो सकती)।
(यदि कहो कि) 'अंकुर उत्पन्न होता है' (शुद्ध असत् से) — तो (किसी की भी) कारक-स्वरूपता नहीं बनेगी (क्योंकि जो अभी असत् है उस पर क्रिया नहीं हो सकती)।