The Vision of Śiva· 4.45 / 124

The Vision of Śiva4.45

4.45
अङ्कुरो जायत इति न भवेत्कारकात्मता ॥४५॥
aṅkuro jāyata iti na bhavetkārakātmatā
— अंकुर ; — उत्पन्न होता है ; — ऐसा (कहने पर) ; — नहीं होगी ; — कारक-स्वरूपता

(यदि कहो कि) 'अंकुर उत्पन्न होता है' (शुद्ध असत् से) — तो (किसी की भी) कारक-स्वरूपता नहीं बनेगी (क्योंकि जो अभी असत् है उस पर क्रिया नहीं हो सकती)।