ज्ञानान्तरेण ज्ञानं तद्विरोधादथ बाध्यते ।
न बाधो भिन्नकालत्वात्प्राक्तनस्याप्यभावतः ॥२३॥
jñānāntareṇa jñānaṃ tadvirodhādatha bādhyate |
na bādho bhinnakālatvātprāktanasyāpyabhāvataḥ
अब यदि (कहो कि) एक ज्ञान दूसरे ज्ञान से, विरोध के कारण, बाधित होता है — (तो उत्तर) बाध नहीं (होता), क्योंकि दोनों भिन्न काल के हैं, और क्योंकि पूर्ववर्ती (ज्ञान बाद वाले के उठने पर) रहता ही नहीं।