The Vision of Śiva· 4.23 / 124

The Vision of Śiva4.23

4.23
ज्ञानान्तरेण ज्ञानं तद्विरोधादथ बाध्यते । न बाधो भिन्नकालत्वात्प्राक्तनस्याप्यभावतः ॥२३॥
jñānāntareṇa jñānaṃ tadvirodhādatha bādhyate | na bādho bhinnakālatvātprāktanasyāpyabhāvataḥ
— दूसरे ज्ञान से ; — ज्ञान ; — वह ; — विरोध के कारण ; — अब ; — बाधित होता है ; — बाध नहीं ; — भिन्न काल के होने से ; — पूर्ववर्ती का भी ; — अभाव के कारण

अब यदि (कहो कि) एक ज्ञान दूसरे ज्ञान से, विरोध के कारण, बाधित होता है — (तो उत्तर) बाध नहीं (होता), क्योंकि दोनों भिन्न काल के हैं, और क्योंकि पूर्ववर्ती (ज्ञान बाद वाले के उठने पर) रहता ही नहीं।