The Vision of Śiva· 4.22 / 124

The Vision of Śiva4.22

4.22
यत्र काले सरजतो देशोऽभूत्स गतस्तदा । कालान्तरेण देशोऽसौ का बाधा भिन्नकालयोः ॥२२॥
yatra kāle sarajato deśo'bhūtsa gatastadā | kālāntareṇa deśo'sau kā bādhā bhinnakālayoḥ
— जिस काल में ; — सरजत (रजत वाला) ; — देश ; — था ; — वह ; — बीत गया ; — तब ; — भिन्न काल का ; — देश ; — यह ; — क्या बाधा ; — भिन्न कालों वाले दोनों में

— (तो उत्तर:) जिस काल में सरजत (रजत वाला) देश था, वह तब बीत गया; और यह देश भिन्न काल का है। भिन्न कालों वाले दोनों में क्या बाधा (हो सकती है)?