The Vision of Śiva· 3.80 / 99

The Vision of Śiva3.80

3.80
निमित्तसमवाययादिवैचित्र्यं तद्विचित्रता । कारणस्यैकरूपत्वे न दोषस्त्रितयात्मता ॥८०॥
nimittasamavāyayādivaicitryaṃ tadvicitratā | kāraṇasyaikarūpatve na doṣastritayātmatā
— निमित्त, समवायी आदि का वैचित्र्य ; — उसकी विचित्रता ; — कारण की ; — एक-रूप होने पर ; — नहीं ; — दोष ; — त्रितय-स्वरूपता (इच्छा-ज्ञान-क्रिया)

निमित्त, समवायी आदि (कारणों) का वैचित्र्य उसी (शिव) की विचित्रता है; कारण के एक-रूप होने पर कोई दोष नहीं, (क्योंकि वह एक कारण ही) त्रितय-स्वरूप (इच्छा-ज्ञान-क्रिया) है।