The Vision of Śiva· 3.81 / 99

The Vision of Śiva3.81

3.81
समवायी तदिच्छैव तद्योगः सहकारणम्म् ॥८१॥
samavāyī tadicchaiva tadyogaḥ sahakāraṇamm
— समवायी (उपादान कारण) ; — उसकी इच्छा ही ; — उसका योग (संयोग, ज्ञान) ; — सहकारी कारण

समवायी (उपादान कारण) उसकी इच्छा ही है; उसका योग (विषय के साथ संयोग, अर्थात् ज्ञान) सहकारी कारण है (और क्रिया निमित्त है — ये तीनों उसकी ही शक्तियाँ हैं)।