The Vision of Śiva· 3.82 / 99

The Vision of Śiva3.82

3.82
न पृथिव्यादिके तस्मिन् कल्पना संप्रवर्तते ॥८२॥
na pṛthivyādike tasmin kalpanā saṃpravartate
— नहीं ; — पृथ्वी आदि (रूप) में ; — उस (शिव) में ; — (मिथ्या) कल्पना ; — प्रवृत्त होती

(अतएव) उस (शिव) में, जो पृथ्वी आदि (रूप) हो रहा है, कोई (मिथ्या) कल्पना प्रवृत्त नहीं होती।