The Vision of Śiva· 3.79 / 99

The Vision of Śiva3.79

3.79
धर्माधर्मैश्च संबन्धस्तथा तच्छिवसंस्थितेः । तत्फलाफलयोगेन युक्तता तस्य तत्स्थितेः ॥७९॥
dharmādharmaiśca saṃbandhastathā tacchivasaṃsthiteḥ | tatphalāphalayogena yuktatā tasya tatsthiteḥ
— धर्म-अधर्मों के साथ ; — और ; — सम्बन्ध ; — वैसे ही ; — उसके उस शिव-रूप में स्थित होने के कारण ; — उनके फल-अफल के योग से ; — युक्तता ; — उसकी ; — उसके उस रूप में स्थित होने के कारण

धर्म-अधर्मों के साथ सम्बन्ध भी उसी (शिव) के उन रूपों में संस्थित होने के कारण (बनता है); और उनके फल-अफल के योग से उसकी (भोक्तृत्व की) युक्तता उसके उस रूप में स्थित होने से (सिद्ध होती है)।