3.78 सर्वमेकेन रूपेण यद्विचार्यं तथाग्रतः ॥७८॥ sarvamekena rūpeṇa yadvicāryaṃ tathāgrataḥ sarvam — सब कुछ ; ekena rūpeṇa — एक ही रूप से ; yat — जो ; vicāryam — विचारणीय ; tathā — तदनुसार ; agrataḥ — आगे सब कुछ एक ही रूप से जैसे (समझा जाना है), वह आगे तदनुसार विचारणीय है।