The Vision of Śiva· 3.78 / 99

The Vision of Śiva3.78

3.78
सर्वमेकेन रूपेण यद्विचार्यं तथाग्रतः ॥७८॥
sarvamekena rūpeṇa yadvicāryaṃ tathāgrataḥ
— सब कुछ ; — एक ही रूप से ; — जो ; — विचारणीय ; — तदनुसार ; — आगे

सब कुछ एक ही रूप से जैसे (समझा जाना है), वह आगे तदनुसार विचारणीय है।